Wednesday, 22 January 2020

नक्सली भय से वाल्टेयर रेल मण्डल के उड़े होश, उठाना पड़ा यह कदम NRC के खिलाफ 20 से 26 जनवरी तक नक्सली,विरोध सप्ताह में वाल्टेयर रेल मण्डल ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए किरंदुल-कोत्तावालसा पैसेंजर ट्रेन को किरंदुल नहीं भेजने का निर्णय लिया है। Ajay Shrivastava Jagdalpur, Chhattisgarh, India Facebook Twitter comment नक्सली भय से वाल्टेयर रेल मण्डल के उड़े होश, उठाना पड़ा यह कदम kk passenger जगदलपुर. NRC के खिलाफ 20 से 26 जनवरी तक नक्सली,विरोध सप्ताह में वाल्टेयर रेल मण्डल ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए किरंदुल-कोत्तावालसा पैसेंजर ट्रेन को किरंदुल नहीं भेजने का निर्णय लिया है। 20 से 26 जनवरी 2020 के बीच केके पैसेंजर कोत्तावालसा से जगदलपुर तक ही चलाई जाएगी। रेल मण्डल ने रात में मालगाडिय़ों के परिचालन पर भी रोक लगा दी है। शाम के बाद जगदलपुर-किरंदुल के बीच ट्रेनों के पहिए थमे रहेेंगे। मालूम हो, हाल ही में जनपितुरी सप्ताह के दौरान जगदलपुर-किरंदुल के बीच ट्रेन सेवा प्रभावित हुई थी। गत वर्ष इसी दौरान नक्सलियों ने रेलवे की संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया था।


18 घंटे पहले - बीजापुर में पुलिस-नक्सली मुठभेड़, एक महिला नक्सली ढेर, ... के खिलाफ 20 से 26 जनवरी तक विरोध सप्ताह मनाएंगे नक्सली, शुरू. ... NRC और नागरिकता कानून के विरोध में नक्सलियों ने फेंके ...
7 घंटे पहले - CAA और NRC के खिलाफ 20 से 26 जनवरी तक विरोध सप्ताह मनाएंगे नक्सली, शुरू किया पोस्टर वार. January 16, 2020 ...
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नक्सली भय से वाल्टेयर रेल मण्डल के उड़े होश, उठाना पड़ा यह कदम

NRC के खिलाफ 20 से 26 जनवरी तक नक्सली,विरोध सप्ताह में वाल्टेयर रेल मण्डल ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए किरंदुल-कोत्तावालसा पैसेंजर ट्रेन को किरंदुल नहीं भेजने का निर्णय लिया है।

जगदलपुर. NRC के खिलाफ 20 से 26 जनवरी तक नक्सली,विरोध सप्ताह में वाल्टेयर रेल मण्डल ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए किरंदुल-कोत्तावालसा पैसेंजर ट्रेन को किरंदुल नहीं भेजने का निर्णय लिया है।

20 से 26 जनवरी 2020 के बीच केके पैसेंजर कोत्तावालसा से जगदलपुर तक ही चलाई जाएगी। रेल मण्डल ने रात में मालगाडिय़ों के परिचालन पर भी रोक लगा दी है। शाम के बाद जगदलपुर-किरंदुल के बीच ट्रेनों के पहिए थमे रहेेंगे।

मालूम हो, हाल ही में जनपितुरी सप्ताह के दौरान जगदलपुर-किरंदुल के बीच ट्रेन सेवा प्रभावित हुई थी। गत वर्ष इसी दौरान नक्सलियों ने रेलवे की संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया था।

Tuesday, 21 January 2020

खींचों ना कमानों को ना तलवार निकालो, जब 1990 से 1994 के बीच जन्म लिये उन मासूमों की गांड का कीमा संगीता कोविंद को परोसना हो जो अधोहस्ताक्षकर्ता के पत्रोपाधि आंदोलन 15 अगस्त 1990 से 26 जनवरी 1994 के दरम्यान जन्म लिये हों किंतु वन मेन आर्मी की अस्वीकृत पीएचडी के 17 JUNE 2003 को प्रकाशित होने से निठारी गांव में 2001 से 2007 तक अकाल मौत न मर पाये हों और अब कालांतर में भारतीय सेना में ठुल्ले बन गये हों ; की हो तो अख़बार अमर उजाला हिंदुस्तान में नोट खिलाकर छाप 2 "26 जनवरी पर हमले की साजिश रची जा रही है.. 6 तरीके से हमला करने का प्लान तैयार किया गया है..; किंतु यदि सिर्फ किडनी लीवर यानि डोकरों/अधेड़ों की गांड के मटन की जरुरत हो तो फोजी / कॉल सेंटर भर्ती की फोटोकॉपी बिकवा 2 और यदि चूतमरियों को दिनदहाड़े साबरमती में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास हनुमान अड्डे के सामने 20 से 25 जनवरी तक गीता / सत्संग धंधे में नचाना हो तो प्रिग्नेंट वूमेन एयरहोस्टेस भर्ती टीवी में बकवा दो ....? इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की वर्गीकृत लूटमारी वाले सभी अखबार जला 2 ...धन्यवाद्

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2 जुल॰ 2010 - जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने भड़काऊ खबरे प्रकाशित करने के आरोप में जम्मू के तीन समाचार पत्रों के छापाखाने सील कर उनके प्रकाशन पर अनिश्चितकाल तक रोक लगा दी गई हैं। जम्मू के उपायुक्त एम. के. द्विवेदी के आदेश पर गुरुवार रात इन ...

जम्मू, 2 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने भड़काऊ खबरे प्रकाशित करने के आरोप में जम्मू के तीन समाचार पत्रों के छापाखाने सील कर उनके प्रकाशन पर अनिश्चितकाल तक रोक लगा दी गई हैं

spotlight: कश्मीर में अखबारों से किसे डर लगता है?

अगर राज्य सरकार को किसी भी समाचार-पत्र से शिकायत है कि वो किसी आतंकवादी को हीरो बना रहा है तो उसे रोकने के लिए प्रावधान है। ऐसे अखबार के खिलाफसबूतों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। महज शक के आधार पर प्रकाशन बंद करना चौथे स्तभ पर सीधा आघात करना है।

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जम्मू में 3 अखबारों का प्रकाशन रोका गया

जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने भड़काऊ खबरे प्रकाशित करने के आरोप में जम्मू के तीन समाचार पत्रों के छापाखाने सील कर उनके प्रकाशन पर अनिश्चितकाल तक रोक लगा दी गई हैं।
जम्मू के उपायुक्त एम. के. द्विवेदी के आदेश पर गुरुवार रात इन समाचार पत्रों के छापखाने (प्रिंटिंग प्रेस) सील कर दिए गए और प्रकाशन को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है।
जम्मू से प्रकाशित होने वाले इन तीन अंग्रेजी समाचार पत्रों को दिए नोटिस में द्विवेदी ने कहा है कि ये तीन समाचार पत्र ('द शैडो', 'अर्ली टाइम्स' और 'ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर') भड़काऊ सामग्री प्रकाशित कर रहे थे।
समाचार पत्रों के खिलाफ यह कार्रवाई तब की गई जब इनमें दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग में एक हिंदू मंदिर पर भीड़ के हमले की खबरें प्रकाशित हुईं हालांकि प्रशासन ने इन खबरों का मजबूती से खंडन किया था।
अनंतनाग के उपायुक्त जे. पी. सिंह द्वारा जारी की गई एक आधिकारिक विज्ञप्ति में इन खबरों को बेबुनियाद बताते हुए कहा गया है कि यह मंदिर सुरक्षित है।

raghuveer singh

July, 22 • 02:56 AM

अगर राज्य सरकार को किसी भी समाचार-पत्र से शिकायत है कि वो किसी आतंकवादी को हीरो बना रहा है तो उसे रोकने के लिए प्रावधान है। ऐसे अखबार के खिलाफसबूतों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। महज शक के आधार पर प्रकाशन बंद करना चौथे स्तभ पर सीधा आघात करना है।


खुशी की बात है कि कश्मीर में पांच दिनों के बाद समाचार-पत्र फिर से प्रकाशित होना शुरू हो गए हैं। अखबार स्टैंड से प्रतियां गायब रहना बड़ा दुखदायी रहा। ये पांच दिन जम्मू-कश्मीर के पत्रकारिता इतिहास में काला अध्याय की तरह दर्ज हुए हैं। यह एक तरह से कश्मीरी प्रेस पर सेंसरशिप ही थी।



विडंबना देखिए, किसी ने भी इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली। प्रिंटिग प्रेस से अखबारों की प्रतियां उठावा ली गईं, रातों-रात उन्हें नष्ट कर दिया गया। कई तरह की अपुष्ट खबरें आईं। एक टेलीविजन पत्रकार ने दावा किया था कि राज्य सरकार के एक मंत्री महोदय ने बताया कि सरकार के आदेश पर प्रकाशन बंद कराया गया। वहीं इसके बाद राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का तबादला किया गया, कहा गया कि इस अधिकारी ने समाचार-पत्रों को बंद कराने की कार्रवाई की थी। 



लेकिन कुल मिलाकर प्रकाशन बंद कराने की जो बातें बाहर निकलकर आईं, उससे लगता है कि सरकारी तंत्र ने ही ऐसी परिस्थितियां बनाईं थी। पर लिखित आदेश जैसी किसी बात का खुलासा नहीं हुआ। खैर, अच्छी बात यह रही कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सभी पत्रकारों को बुलाकर उनसे व्यक्तिगत तौर पर माफी मांगी। पर अखबार के संपादकों ने कहा कि अखबारों का प्रकाशन तभी शुरू करेंगे, जब सरकार आश्वासन दे कि वह ऐसी परिस्थितियां दोबारा नहीं बनने देगी। एक-दो दिन यह आश्वासन न मिल पाने के कारण ही संपादकों ने प्रकाशन नहीं होने दिया। 



अगर सरकार को किसी भी समाचार-पत्र से शिकायत है कि वो किसी आतंकवादी को हीरो बना रहा है या देशहित के खिलाफ काम कर रहा है तो उसे रोकने के लिए प्रावधान है। उस अखबार के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। महज शक के आधार पर किसी अखबार को बंद करना चौथे स्तंभ पर सीधा आघात करना है। इसका दुष्परिणाम ही देखने को मिलता है। कश्मीर जैसी संवदेनशील जगहों पर लोगों में गलत सूचनाएं प्रसारित होती हैं और अफवाहों का जोर रहता है। 



कश्मीर घाटी में जिस तरह की परिस्थितियां रहती हैं उसमें स्थानीय पत्रकारों ने बड़ी हिम्मत से काम किया है। अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया है। उसी का नतीजा है कि कश्मीरी समाचार-पत्र लोगों में काफी पढ़े जाते हैं। कश्मीरियों को पढऩे-लिखने का शौक है। इसी का उदाहरण है कि पिछले कुछ वर्षों में वहां अंग्रेजी समाचार-पत्रों ने जोर पकड़ा है। वरना पहले उर्दू के अखबार ही पढ़े जाते थे। कश्मीर जैसे राज्य में अकबर इलाहाबादी का शेर सटीक बैठता है - 
'खींचों ना कमानों को ना तलवार निकालो, 
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।'



यहां अखबारों की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि लेह-लद्दाख जैसे विपरीत भौगोलिक परिस्थिति वाले इलाके में भी जनता के बीच अखबार जोर पकड़ रहे हैं। वहां पत्रकारों ने एकत्र होकर लेह में प्रेस क्लब की स्थापना भी की है। इस पूरे राज्य में घूमें तो यहां खबरों के लिए एक जुनून-सा दिखाई देता है। इसलिए कश्मीर में समाचार-पत्रों को बंद करने का रास्ता अपनाना समस्या को शांत करने का जरिया नहीं हो सकता बल्कि सूचना के अभाव में समस्या ज्यादा विकट हो जाती है। हां, एक दौर था जब अखबारों का इस्तेमाल सही सूचनाओं की बजाय आतंकवादी अपने हित में कराया करते थे। 


1989 से 1993 तक, वह दौर था जब मीडिया स्वतंत्र नहीं था। आतंकवादियों का समाचार-पत्रों पर नियंत्रण था। मुझे याद है उस दौर में उर्दू अखबार 'श्रीनगर टाइम्सÓ के संपादक रहे स्व. सूफी गुलाम मोहम्मद ने बताया था, 'अखबार मेरा है, प्रिंट लाइन में नाम मेरा है, प्रिंटिंग प्रेस मेरी है पर अखबार में जो खबर है वह मेरी नहीं है।Ó यह वह दौर था, जब वहां के अखबारों में 'मिलिटेंटÓ शब्द ही नहीं लिखा जाता था। राज्य सरकार की खबरें नहीं छपती थीं। नेशनल कांफ्रेंस और फारुख अब्दुल्ला का नाम प्रकाशित नहीं होता था। फिर 1996 के बाद घाटी में हालात सुधरे। धीरे-धीरे अखबारों की संख्या बढ़ी। संपादकों और मालिकों ने अपनी अथॉरिटी जमानी शुरू की।  




अब वहां समाचार-पत्र खुलकर अपना काम करते हैं। ताजा बुरहान वानी एनकाउंटर मामले में आरोप लगाया गया कि स्थानीय मीडिया ने उसे 'हीरोÓ बना दिया पर ऐसा नहीं है। वानी सोशल मीडिया के जरिए कश्मीर में छाया हुआ था। लाखों लोग उसकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। मीडिया ने उसे कवरेज दी, जो स्वाभाविक है क्योंकि जहां 'पॉपुलर मूडÓ ही उसे हीरो मान रहा हो तो मीडिया कैसे नजरंदाज कर सकता है। हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि वहां अलगाववादियों से सहानुभूति रखने वाले बुद्धिजीवी और पत्रकार भी हैं। पर यह कहना कि समूचे कश्मीर का मीडिया पक्षपाती है, यह गलत है। वहां के अखबार और पत्रकार बाकी राज्यों की तरह ही 'लॉ ऑफ द लैंडÓ को मानकर ही खबरें प्रकाशित करते हैं। 




कश्मीरियों को पढऩे-लिखने का शौक है। इसी का उदाहरण है कि पिछले कुछ वर्षों में वहां अंग्रेजी समाचार पत्रों ने जोर भी पकड़ा है। वरना पहले उर्दू के अखबार ही पढ़े जाते थे। अखबार का प्रकाशन रोकने से शांति स्थापित नहीं हो सकती।


पुष्प सराफ, वरिष्ठ पत्रकार
पत्रकारिता का लंबा अनुभव। जम्मू और कश्मीर के मामलों के जानकार।
कश्मीर जैसी संवदेनशील जगहों पर लोगों में गलत सूचनाएं प्रसारित होती हैं और अफवाहों का जोर रहता है। कश्मीर घाटी में जिस तरह की परिस्थितियां रहती हैं उसमें स्थानीय पत्रकारों ने बड़ी हिम्मत से काम किया है। अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया है। 

26 जनवरी को द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमला करने की साजिश रच रहा है ISI, टारगेट पर दिल्ली

खुफिया विभाग को मिली जानकारी के अनुसार हिजबुल के लोगों से ट्रेनिंग लेकर अल बद्र के द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हिजबुल के लॉजिस्टिक सपोर्ट का इस्तेमाल कर हमला कर सकता हैं.
भारत में गणतंत्र दिवस पर आईएसआई आंतकी हमला करने की साजिश रच रहा है. खुफिया विभाग को मिली जानकारी के मुताबिक आईएसआई के तमिलनाडु मॉड्यूल के फरार 4 द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों भी 26 जनवरी पर दिल्ली को टारगेट करने का प्लान कर रहे हैं.
खुफिया विभाग को मिली जानकारी के अनुसार हिजबुल के लोगों से ट्रेनिंग लेकर अल बद्र के द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हिजबुल के लॉजिस्टिक सपोर्ट का इस्तेमाल कर हमला कर सकता हैं. इस तरह गणतंत्र दिवस के मौके पर हमले की जिम्मेदारी अल बद्र की हो सकती है.
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वहीं, खबर है कि सरहद पार बैठे द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबार क के आकाओं का मानना है कि अल बद्र को जिंदा कर उसकी पहचान वापस दिलाने के लिए एक बड़ा हमला कर सकती है. इसलिये आईएसआई ने अल बद्र को सक्रिय करने की जिम्मेदारी हिजबुल कमांडर रियाज नायकू को सौंपी है. बता दें कि पाकिस्तान में करीब 40 द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों संगठन सक्रिय हैं, जो हमेशा से भारत के लिए खतरा हैं. इनमें से अल बद्र भी है.
सूत्रों की माने तो रियाज नायकू गंभीर रूप से बीमार है. बताया जाता है कि उसकी किडनी खराब है. इसलिए उसने ये जिम्मेदारी अपने साथी द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हम्माद को सौंप दी. हम्माद फिलहाल अल बद्र के लिए रिक्रूटमेंट और ट्रेनिंग के काम को देख रहा है.
5 घंटे पहले - ... विदेशी द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबार कियों ने कश्मीर में 26 जनवरी से पहले बड़े हमले ... द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों कश्मीर में सुरक्षा बलों के कैंप पर फिदायीन हमला ...
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5 घंटे पहले - News State ने अपलोड किया
दिल्ली में 26 जनवरी पर द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों साजिश रची जा रही है. पाकिस्तान बॉर्डर पर 6 तरीके से हमला करने का प्लान तैयार किया गया है.
6 घंटे पहले
दिल्ली में 26 जनवरी पर द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों साजिश रची जा रही है. पाकिस्तान बॉर्डर पर 6 तरीके से हमला करने का प्लान तैयार किया गया है.
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22 मिनट पहले - जैश-ए-मोहम्मद के 5 द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों गिरफ्तार, गणतंत्र दिवस पर रची थी बड़े हमले की साजिश ... जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमले की बड़ी साजिश को नाकाम कर जैश-ए-मोहम्मद के 5 ... कि द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों 26 जनवरी को ग्रेनेड से हमला करने की तैयारी में थे।

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5 घंटे पहले - 26 जनवरी को द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमला करने की साजिश रच रहा है ISI, टारगेट पर दिल्ली.

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7 घंटे पहले - सेब के बगीचे में तैयार हुआ 26 जनवरी से पहले द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमले का ... में 8 द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबार कियों ने हमले के लिए बैठक की है और साजिश रची.
6 दिन पहले - गिरफ्तार द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों 26 जनवरी को ग्रेनेड से हमला करने की तैयारी में थे. गिरफ्तार किए गए द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबार कियों में एजाज ...
6 दिन पहले - 26 जनवरी पर द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमले की साजिश नाकाम, श्रीनगर से जैश के 5 द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों गिरफ्तार. श्रीनगर, लाइव हिन्दुस्तान.
आप इस पेज पर 21/1/20 को गए थे.
6 दिन पहले - ये 26 जनवरी के मौके पर हमले की साजिश रच रहे थे। ... में मुठभेड़ में हिजबुल और जैश के तीन द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों मारे गए थे।
26 मिनट पहले - जैश-ए-मोहम्मद के 5 द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों गिरफ्तार, गणतंत्र दिवस पर रची थी ... ने गणतंत्र दिवस पर द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमले की बड़ी साजिश को नाकाम कर ... कि द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों 26 जनवरी को ग्रेनेड से हमला करने की तैयारी में थे।
7 घंटे पहले - \BITMS के फंडिंग का मामला अब 18 जनवरी को होनी वाली जीडीए की ... 26 जनवरी को कश्मीर में बड़े द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमले की साजिश का ...
11 घंटे पहले - गणतंत्र दिवस पर बड़े द शैडो’, ‘अर्ली टाइम्स’ और ‘ग्लिम्प्स ऑफ फ्यूचर’ अखबारों हमले की साजिश नाकाम, जैश के पांच ... 26 जनवरी को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के ...

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.होम / State/The news of the death of Naxalite commander Paparao was stirred up,

नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी से हड़कंप, मामले की पड़ताल में जुटी खुफिया एजेंसियां

 Edited By: Anil Kumar Shukla
Published on 21 Jan 2020 07:16 PM, Updated On 21 Jan 2020 07:16 PM



सुकमा। नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी से नक्सल कुनबे में हड़कंप मच गया है। वहीं पुलिस की खुफिया एजेंसियां भी मामले की पड़ताल में जुटी हैं। बता दें कि यहां कई इलाकों से खुफिया एजेंसियों को नक्सली पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी मिल रही है।
नक्सली पापाराव 2010 में ताड़मेटला कांड का मास्टर माइंड था, इस घटना में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे।
इसके पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्यवाही करते हुए नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचाया था, यहां भी नक्सली कमांडर पापाराव की इस मुठभेड़ में घायल होने की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी थी।.

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नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी से हड़कंप, मामले की पड़ताल में जुटी खुफिया एजेंसियां. Edited By: Anil Kumar Shukla. Published on 21 Jan 2020 07:16 PM, Updated On 21 Jan 2020 07:16 PM. Web Title : The news of the death of Naxalite commander Paparao was stirred up, ...

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28 अप्रैल 2017 - DD News ने अपलोड किया
सुकमा में हुए नक्सली हमले के बाद नक्सलवाद को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। नक्सली अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं लेकिन सुरक्षाबलों की बढ़ती उपस्थिति के चलते नक्सलियों ...
अनुपलब्ध: paparao ‎kbr ‎hadkamp

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16 घंटे पहले - ताड़मेटला कांड के मास्टर माइंड नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी  से नक्सल कुनबे में हड़कंप मच गया है।khabar36.
10 दिस॰ 2019 - सुकमा. मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर रमन्ना उर्फ रावलु श्रीनिवास ने अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या  होने की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी  है। यह भी बताया जा रहा है कि सोमवार को बीजापुर जिले के पामेड़ और बासागुड़ा गांव के बीच जंगल में उसका अंतिम संस्कार किया गया। पिछले दो ...
अनुपलब्ध: पापाराव ‎हड़कंप
9 दिस॰ 2019 - जगदलपुर। नईदुनिया। Chhattisgarh News खूंखार नक्सल कमांडर 55 वर्षीय रमन्ना की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी  आ रही है। सूत्रों के मुताबिक उसकी अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या  हार्ट अटैक से हुई है। आईजी बस्तर सुंदरराज पी ने कहा है कि पुलिस और खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे इनपुट ...
अनुपलब्ध: पापाराव ‎हड़कंप
Share. IBC24 • Today at 6:05 AM. Rajgarh मामले में Ministers ने किया समर्थन | Collector-Deputy Collector के समर्थन में उतरी Government. 1111. Share. IBC24 • Today at 6:04 AM. नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी से हड़कंप, मामले की पड़ताल में जुटी खुफिया एजेंसियां.
13 घंटे पहले - शहर के तालपुरी कॉलोनी में मंगलवार सुबह तीन लोगों की हत्या से हड़कंप मच गया। ट्रिपल मर्डर मामले में ... नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी से हड़कंप, मामले की पड़ताल में जुटी खुफिया एजेंसियां • भिलाई के ट्रिपल मर्डर केस में ...
..Home  जिले  रायपुर  ताड़मेटला कांड के मास्टरमाइंड पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या , खुफिया एजेंसियां पड़ताल में जुटी

ताड़मेटला कांड के मास्टरमाइंड पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या , खुफिया एजेंसियां पड़ताल में जुटी

सुकमा। ताड़मेटला कांड के मास्टर माइंड नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी से नक्सल कुनबे में हड़कंप मच गया है। यहां कई इलाकों से खुफिया एजेंसियों को नक्सली पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी मिल रही है। नक्सली पापाराव 2010 में ताड़मेटला कांड का मास्टर माइंड था, इस घटना में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद […]

 
ताड़मेटला कांड के मास्टरमाइंड पापाराव की अखबार टीवी  मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या , खुफिया एजेंसियां पड़ताल में जुटी
सुकमा। ताड़मेटला कांड के मास्टर माइंड नक्सली कमांडर पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी से नक्सल कुनबे में हड़कंप मच गया है। यहां कई इलाकों से खुफिया एजेंसियों को नक्सली पापाराव की अखबार टीवी मीडिया की मनगढंत स्टोरी गांड मारकर अखबारी हत्या की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी मिल रही है।
नक्सली पापाराव 2010 में ताड़मेटला कांड का मास्टर माइंड था, इस घटना में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे।
इसके पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्यवाही करते हुए नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचाया था, यहां भी नक्सली कमांडर पापाराव की इस मुठभेड़ में घायल होने की अखबार टीवी पेपर मीडिया की मनगढंत स्टोरी थी।